BreakingA simple royal wedding was held with a shagun of Rs 1. IPS KK Bishnoi and Anshika Verma became life partners and a grand reception was held in Jodhpur.BreakingBhajan singer Chhotu Singh Ravan, troubled by threats, seeks protection from SP – will file FIR on April 1st...BreakingA young man returning from a wedding was attacked with swords, an old rivalry claimed his life in Udaipur.BreakingRavindra Singh Bhati, Chhotu Singh Rawana, Barmer controversy, Shiv MLA, social media controversy, FIR, defamation case, CID-CB investigation, Rajput community, road video controversyBreakingBeware! Account emptied in one click—major case of cyber fraud in Jodhpur...BreakingDespite scoring 93%, her happiness remained unfulfilled – Nikita from Sri Ganganagar passed away before the results were announced.BreakingA simple royal wedding was held with a shagun of Rs 1. IPS KK Bishnoi and Anshika Verma became life partners and a grand reception was held in Jodhpur.BreakingBhajan singer Chhotu Singh Ravan, troubled by threats, seeks protection from SP – will file FIR on April 1st...BreakingA young man returning from a wedding was attacked with swords, an old rivalry claimed his life in Udaipur.BreakingRavindra Singh Bhati, Chhotu Singh Rawana, Barmer controversy, Shiv MLA, social media controversy, FIR, defamation case, CID-CB investigation, Rajput community, road video controversyBreakingBeware! Account emptied in one click—major case of cyber fraud in Jodhpur...BreakingDespite scoring 93%, her happiness remained unfulfilled – Nikita from Sri Ganganagar passed away before the results were announced.
News·JambhSar Media·

पर्यावरण संरक्षण में सबसे पिछड़ा प्रदेश राजस्थान जहा पेड़ों के लिए हुवे केई बलिदान

363 शहीदों के बलिदान को नजर अदाज का  उदाहरण पर्यावरण संरक्षण में सबसे पिछड़ा प्रदेश राजस्थान

World Environments Day 2023 Jambhsar Media- विश्व मे हर वर्ष 5
जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य विश्व में पर्यावरण की
सुरक्षा और संरक्षण हेतु एक जागरूकता उत्पन्न करना है इस दिवस को मनाने का मुख्य
उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के द्वारा घोषणा की गई जो पर्यावरण के प्रति वैश्विक
स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने का उद्देश्य था पर्यावरण दिवस
5
जून को मनाने की घोषणा
1972 में की गई थी जो आज भी लगातार 5
जून को
पर्यावरण  दिवस के रूप में मनाया जाता है|

World Environment Day 2023 


सेंटर फॉर साइट के अनुसार पर्यावरण
दिवस भारत के राज्यों की रैंकिंग

विश्व पर्यावरण दिवस 5
जून को पूरी दुनिया में बहुत ही शानदार कार्यक्रम होता है इस दिन कई कार्यक्रमों
में जो आयोजन होते हैं जिसमें संरक्षण का महत्व बताया जाता है पर्यावरण को
सुरक्षित करने के लिए नए संकल्प लिए जाते हैं
विश्व पर्यावरण के मौके पर भारत में पर्यावरण के लिए
काम करने वाली संस्थाएं सेंटर फॉर साइट एंड एनवायरमेंट जिसने अप
नी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की हैं रिपोर्ट मे स्टेट ऑफ इंडिया गारमेंट इन फिगर्स 2023 के
नाम से एक प्रकाशन रिपोर्ट में पर्यावरण के लिए किए जा रहे कामों के आधार पर
राज्यों को उनके पर्यावरण संरक्षण के प्रति कार्यों की एक रैंकिंग प्रदान कि
है| जिसमें 29 राज्यों की एक
रैंकिंग में सबसे सिर्फ पर तेलंगाना है जबकि राजस्थान सबसे निचले पायदान पर है यह
बहुत ही दुविधा की बात है कि जिस
प्रदेश
के अंदर पर्यावरण संरक्षण की ज्योत जलाने वाले पर्यावरण को बचाने के लिए एक साथ
363
लोग शहीद होने वाले समाज की बहुतायत हैं और वह समाज
पर्यावरण सरक्षण के लिए हमेशा राजस्थान में संघर्ष करता
है लेकिन फिर भी यह राज्य सबसे निचले पायदान पर हैं इसका मुख्य कारण प्रदेश की
पर्यावरण के प्रति संघर्ष करने वाली जनता के साथ सरकार का खड़ा ना होना
साफ साफ बताता है

तेलंगाना में पर्यावरण सरंक्षण में पाई प्रथम
रैंक

भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने
वाल
सेंटर फॉर साइड एंड
एनवायरमेंट की वार्षिक रिपोर्ट स्टेट ऑफ इंडिया इन्वायरमेंट इन फिगर्स अनुसार
तेलंगाना ने
10 अंकों में से 7.2 13 अंक प्राप्त कीये है सीएससी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य
में वन आवरण में अच्छी प्रगति की है साथ मुंसिपल वेस्ट ट्रीटमेंट के मामले में
तेलंगाना का बहुत अच्छा प्रोसीजर है इसलिए यह राज्य प्रथम स्थान यानी शीर्ष पर है
गुजरात दूसरे, स्थान गोवा तीसरे , महाराष्ट्र चौथे स्थान पर है| सेंटर फॉर साइट
एंड एनवायरमेंट सोसाइटी के अनुसार उन्होंने अपनी रिपोर्ट में उन्होंने दावा किया
है कि तेलंगाना में बेहतर काम हुए हैं|

जहां पर्यावरण के लिए 363 लोग शहीद हुए वो प्रदेश सबसे निचले पायदान पर

सेंटर फॉर साइट की रिपोर्ट माने तो उसके अनुसार
सबसे कम स्कोर हासिल करने वाला राज्य राजस्थान है जो पर्यावरण के अंदर सबसे
निचले पायदान वाला प्रदेश हैं
राजस्थान को सिर्फ
2.75 7 अंक ही प्राप्त हुए हैं पर्यावरण
सरंक्षण के मामले में राजस्थान
30% से कम स्कोर करने वाला एकमात्र राज्य
है राजस्थान के अलावा नागालैंड बिहार और पश्चिम बंगाल
भी निचले पायदान पर रहने वाले राज्यों में है लेकिन राजस्थान मे बिशनोई समाज की बहुतायत है जो पर्यावरण
के लिए हमेशा पर्येतन कर्ता रहेता है फिर भी इतना पिछड़ा हुवा क्यों है ये बहुत बड़ा
सवाल खड़ा करता है |

आईये
जानते कैसे हुई
राज्यों की पर्यावरण की यह
रैंकिंग

सेंटर फॉर साइट की
रिपोर्ट में देश के सभी
29 राज्यों को पर्यावरण के कसौटी पर रखने
के लिए
7 मांगों को तय किया गया औरइन
सात
मांगों का इस्तेमाल करते हुए वन आवरण में परिवर्तन, म्युनिसिपल
सॉलि़ड वेस्ट ट्रीटमेंट, का उपचार उपचारित सीवेज, अक्षय ऊर्जा ग्रिड में बदलाव,
प्रदूषित नदी के स्ट्रेस में सुधार,
भुजल
निकाली और उपयोग में नहीं
आने वाले जल
निकासी को शामिल किया
गया था उसी के अनुसार
इस संगठन द्वार पर्यावरण दिवस के ऊपर राज्यों की रेंकिंग रिपोर्ट जारी की गई है |

कब से मनाया
जाता है
विश्व पर्यावरण दिवस

वेशविक स्तर पर 1972
में पर्यावरण दिवस की घोषणा हुई थी और हर साल तब से मनाया जा र
हा हैं विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा
संरक्षण हेतु संपूर्ण विश्व में
5 जून को मनाया जाता है पर्यावरण दिवस
की घोषणा
इसको मनाने का
उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और
सामाजिक जागृति लाने के उद्देश्य से वर्ष
1972 में इसकी
शुरुआत की थी और इसके बाद से यह हर वर्ष इसे मनाया जाता है और पर्यावरण दिवस के
मौके पर अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीकों से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं| भारत
में भी वृक्ष रोपण करके पर्यावरण दिवस को मनाने की आज भी हम झलक जगह जगह पर देखते
हैं जिसका एक ही उद्देश्य है कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना

क्या रहेगा 2023 के पर्यावरण
दिवस का थींम्

हर वर्ष पर्यावरण
दिवस पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से मनाया जाता है
लेकिन विश्व पर्यावरण दिवस
2023 का मूल उद्देश्य दुनिया भर में लोगों
के बीच
पर्यावरण से जुड़े
मुद्दे जिसमें ब्लैक होल इनफेक्ट और ग्रीन हाउस के प्रभाव का मुद्दा भी शामिल है
जलवायु परिवर्तन का मुद्दा है पर्यावरण प्रदूषण का मुद्दा है ग्लोबल वार्मिंग का
मुद्दा है इन मुद्दों पर लोगों में जागरूकता फैलाने का प्रयास है ग्लोबल वार्मिंग
जलवायु परिवर्तन से दुनिया का हर देश परेशान है मौसम में हो रहे बदलाव से कृषि
चक्र के अंदर परेशानी तो है ही हैं इसके साथ-साथ हमारा जीवन यापन बुरी तरह से
लगातार प्रभावित होता जा रहा है पर्यावरण दिवस मनाने के पीछे मूल उद्देश्य पृथ्वी
को सुरक्षित करना हमारी पृथ्वी जो हमारे घर की तरह हैं जहां सभी तरह के प्राणी
रहते हैं मनुष्य, पशु-पक्षी, पौधे सभी निवास करते हैं पर्यावरण के संरक्षण के लिए
विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ पर्यावरण के प्रति
लोगों में जागरूकता लाना और वर्ल्ड एनवायरमेंट डे हर वर्ष
5 जून को ही
मनाया जाता है और इसकी शुरुआत
1972 में पर्यावरण के लिए संयुक्त राष्ट्र
सम्मेलन के दौरान हुई थी|

 
आखिर 5 जून को ही क्यों मनाया जाता है
पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस प्रकृति और हरियाली के
महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा
आयोजित सबसे बड़ी यह वार्षिक आयोजन है
विश्व
पर्यावरण
दिवस हर साल 5 जून को ही मनाया जाता है धरती को हम
सब मिलकर और अधिक सुंदर कैसे बनाएं इसी उद्देश्य से पर्यावरण दिवस की शुरुआत हुई
थी धरती पर मनुष्य पशु पक्षियों के रहने योग्य बनाने के लिए ही प्रकृति व पर्यावरण
को सुरक्षित करना भी जरूरी है
र्यावरण
और धरती जीवन जीने के लिए सबसे जरूरी चीजें उपलब्ध कराती हैं धरती पर
जीवन जीने के लिए अच्छे वातावरण की आवश्यकता होती हैं जो हमें सिर्फ प्रकृति से प्राप्त हो पाती हैं पर्यावरण
दिवस
की आवस्यकता  लगातार पर्यावरण को हो रहे नुकसान के चलते इसकी
सुरक्षा के लिए आज प्रदूषण की समस्या के वैश्विक स्तर पर चिंता को ध्यान में रखते
हुए विश्व पर्यावरण दिवस की नींव रखी गई थी यह विश्व दिवस में संयुक्त राष्ट्र संघ
की ओर से इसकी घोषणा की गई थी
स्वीडन
की
राजधानी स्टॉकहोम में इसकी शुरुआत हुई थी स्टॉकहोम में आयोजित एक
सम्मेलन में दुनिया भर से
119 देश वहां पर उपस्थित हुए थे संयुक्त राष्ट्र द्वारा
आयोजित इस दिवस की घोषणा की गई इस सम्मेलन में ही हर साल
5 जून को विश्व
पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था

आखिर राजस्थान का पर्यावरण के प्रति पिछड़ने का
कारण क्या है

350  से अधिक वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चलाने वाले और विश्व के अंदर सबसे पहले पर्यावरण का महत्व बनाने वाले गुरु जंभेश्वर भगवान जो राजस्थान की धरा धरती से पूरे विश्व को संदेश दिया था कि पेड़ पौधे जीवित प्राणी है और इनका जीवित रहना बहुत जरूरी है इस मैसेज को आज भी फॉलो करने वाला बिश्नोई समाज जिसकी बहुतायत है राजस्थान के अंदर और यह समाज हमेशा संघर्ष करता रहता है पर्यावरण संरक्षण के लिए और बड़े बड़े आंदोलन भी इस समाज ने किए लेकिन राजस्थान आज पर्यावरण सरंक्षण के इंडेक्स के अंदर भारत के अंदर हुए एक सर्वे के अनुसार देश में सबसे निचले पायदान की रैंकिंग पर रहने वाला प्रदेश है सेंटर फॉर साइट एनवायरमेंट के द्वारा जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट बताती हैं कि राजस्थान सबसे निचले पायदान पर हैं पर्यावरण सरंक्षण की लड़ाई लड़ने वाले लोगों के मुद्दों पर सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना  अनदेखी करना सबसे बड़ा कारण पर्यावरण सरंक्षण के निचले पायदान पर राजस्थान के रहने का हो सकता है

आप लोगों की क्या राय है कमेंट के माध्यम से
जरूर बताएं

#World_Environments_Day_2023 #Jambhsar_media #Environments #Rajasthan_In_Environments

Share this article

Related Articles