बीकानेर के मोठ के भुजिया को
छोड़ सकता है पीछे बाजरे का भुजिया
जोधपुर हमेशा चटपटे, समोसा
, मिर्चीबाडा ओर व्यंजनों के लिए विश्व विख्यात रहा है हाल ही मे केंद्रीय शुष्क
क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) जोधपुर मे बीकानेर के मोठ के भुजिया की तर्ज पर
यहां बाजरे का भुजिया तैयार किया है। बाजरे के साथ थोड़ा सा मूंग मिलाकर इसे बहुत
अधिक पौष्टिक बना दिया गया है। खाने में यह बीकानेरी भुजिया जैसा ही स्वादिष्ट है, जिसे
छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक आसानी से खा सकते हैं। काजरी की ओर से विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी विभाग के एक प्रोजेक्ट के तहत बिट्स पिलानी के तकनीकी
सहयोग से गावों में महिलाओं का स्वयं सहायता समूह बनाकर बाजरे के उत्पाद तैयार किए
जा रहे हैं जिससे महिलाओं में एंट्रीप्रेन्योरशिप पैदा की जा सके।
एफएसएसआइ से मिला
सर्टिफिकेट
बाजरे का भुजिया हल्के
भूरे रंग का है। बाजरे में हस्क होने से इसमें मूंग-मोठ की भुजिया की तुलना में
कुरकुरापन अधिक है। ऐसे में छोटे बच्चे भी आसानी से नाश्ते में खा सकते हैं। इससे
पेट में गैस व अपच की समस्या भी नहीं है। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड ऑथरिटी ऑफ इंडिया
(एफएसएसएआई) ने भी इसे बेचने के लिए सर्टिफाइड किया है। प्रोटीन से भरपूर होने से मिलेगा
ऊर्जा छोटे बच्चे से लहर बड़े उठा सकेंगे लुत्फ
भुजिया में पोषक तत्व
12 ग्राम प्रोटीन प्रत्येक
सौ ग्राम में
60 प्रतिशत कार्बोइड्रेट
8 ग्राम तक वसा है मौजूद
प्रधान वैज्ञानिक, काजरी
जोधपुर
250 किलोकैलोरी है
प्रत्येक सौ ग्राम में
बाजरा ग्लूटेन फ्री होने
से पूरी दुनिया में इस समय बड़े अनाज की डिमाण्ड है। इसका भुजिया बेहद स्वादिष्ट व
गुणवत्तापूर्ण है। ग्रामीण महिलाएं इससे स्वयं का बिजनेस शुरू कर सकती है। महिलाओ की पहली पसंद बन सकता है बाजरे से बनने वाली नमकीन








