ऊंट रेगिस्तान का जहाज है आखिर क्यों
राजस्थान की धोरा धरती को बहुत बड़ा योगदान रहा है उनका ऊंट के पैरों के तलवे मोटे और गद्दार होने की वजह से राजस्थान के रेतीले धोरों में हंसते नहीं है इसलिए एक जमाने के अंदर ऊंट राजस्थानी ओं के लिए वरदान साबित हुआ था वहीं मौजूदा समय के अंदर मशीनरी युग के चलते इस नोट को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हो लेकिन एक जमाना रहा था जब ऊंट राजस्थान में का मुख्य एक संसाधन हुआ करता था और किसानों का मित्र प्राणी हुआ करता था मशीनी युग में जीवन को छीन लिया लेकिन राजस्थान की धरती के अनुकूल सरवाइव करने वाला एकमात्र ऐसा प्राणी है जो लंबे समय तक बिना पानी पिए जीवित रह सकता है कहा जाता है कि एक बार में लगभग 6 लीटर पानी पीता है जो एक हफ्ता तक पानी पिए बगैर जिंदा रह सकता है इस पानी को स्टोरेज करता है और जरूरत पड़ती है तो उस पानी को वहां से इस्तेमाल कर लेता है इसीलिए राजस्थान की धरती के अंदर उपयोगी जानवर के रूप में जाना जाता है आज भी राजस्थान के अंदर पाया जाता है
भारत के अंदर ऊंट के 9 वंश पाए जाते हैं
भारत के अंदर के राज्यों के अंदर ऊंट पालने का चलन है सबसे ज्यादा होटल राजस्थान में पाए जाते हैं और राजस्थान के अंदर होठों की नस्ल जैसलमेरी बीकानेरी मेवाड़ी जालोरी मारवाड़ी आदि नस्लें हैं हरियाणा में मेवाती मध्यप्रदेश में मालवी नस्ल के उठे हैं जिसमें महाराष्ट्र में गुजरात में कच्ची और खराई नस्ल के उठ पाए जाते हैं ऊंट के प्राकृतिक आवास वाले देशों में विश्व योग दिवस 22 जून को मनाया जाता है सामाजिक और आर्थिक विकास में भारत के अंदर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है
देश की आधी से अधिक आबादी ऊंटों की राजस्थान में निवास करती हैं
ऊंट को रेगिस्तान का जहाज के नाम से भी जाना जाता है सबसे प्रसिद्ध ऊंट बीकानेरी भेज जैसलमेरी नस्ल के माने जाते हैं देश के कुल वोटों की आधी से अधिक संख्या राजस्थान में पाई जाती हैं इसमें एक कूबड़ वाले ऊंट जिसे अरबी वोट भी कहा जाता है माना जाता है कि राजस्थान की धरती के अंदर सबसे अच्छी तरह सफाई करने वाला प्राणी है जिसे एक जगह से दूसरी जगह जाने बोझा ढोने के लिए राजस्थानी लोग बहुत है यार रूप से काम लेते हैं मोट को राजस्थान का राज्य पशु माना जाता है इस संबंध में राजस्थान सरकार ने 30 जून 2014 को को पशुधन श्रेणी में राज्य पशु घोषित किया था जिसको 19 सितंबर 2014 को जारी अधिसूचना के तहत अब राजस्थान का राज्य पशु के रूप में जाना जाता है
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में ऊंटों की फौज ने लड़ा था युद्ध
घोड़े हाथी विमान तरह-तरह के वाहन युद्ध के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन राजस्थान को यह श्रेय प्राप्त हैं सन 1989 में बीकानेर रियासत के महाराजा गगन सिंह ने गंगा रिसाला नामक ऊंट सवार फौजदार के लिए जो प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेकर उन्होंने अपना परचम लहराया था राजस्थान के बीकानेर जिले के अंदर प्रतिवर्ष जनवरी माह में ऊंट उत्सव का आयोजन किया जाता है उनको पहला अस्पताल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में खोला गया जहां अलग से ऊंटनी के दूध की डेरी भी स्थापित की गई अब राजस्थान के अंदर भी बीकानेर के अंदर अनुसंधान केंद्र भी स्थापित है जहां पर ऊंट और उनके द्वारा निकलने वाले प्रोडक्ट के ऊपर अनुसंधान करके कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं जिसके अंदर के गोबर से बनने वाला मोटा कागज बहुत प्रसिद्ध है और भी बहुत सारी चीजें हैं ऊंटनी का दूध बहुत ही उपयोगी है जो डायबिटीज ऑटिज्म 10 टीवी घटिया आदि रोगों में भी इसका बहुत कारगर उपयोग साबित होता है कहा जाता है कि ऊंटनी के दूध में लोह तत्व विटामिन का भंडार है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है जिनको लोगों के उपयोगी जीवन के अंदर काम लिया जाता है
क्यों जरूरी है उसको बचाना
मौजूदा समय में लुप्त हो रहे जानवरों को बचाने का प्रयास सरकार ने समय-समय पर करती रही है इसी के अंदर सबसे बड़ी दुविधा का अंदर है वोट क्योंकि ऊंट जहां सामाजिक और आर्थिक विकास में मददगार रहा है वहीं उन कामों की जगह दूसरे संसाधनों में लेने की वजह से ऊंट का उपयोग दिनोंदिन कम होता जा रहा है लेकिन इतना ही नहीं उठने के दूध में बहुत मात्रा में लौह तत्व विटामिन का भंडार होने की वजह से इसका वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत ही गुणकारी दूध माना जाता है ऊंटनी का दूध हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है इस कदर डायबिटीज और गठिया आदि रोगों में में लोग बीमार हो रोगियों को बहुतायत रूप में देते हैं जिससे रोगी ठीक भी होते हैं फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के रूप में मान्यता दे रखी है ऊंट को शिक्षित करने के लिए लोगों की बार-बार मांगे उठती रही हैं कि उनसे निकलने वाले प्रोडक्ट को संगठित करने का प्रयास किया जाए लोगों के सुझाव आए हैं कि गौशाला की तर्ज पर स्थापित की जाए को सिद्ध करने का प्रयास किया जाए साथ ही डेयरी पशु के रूप में इसका विकास और चारा गांव के विकास करने को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए और सरकार को इसके लिए उपयोगी कदम उठाया जाए इन्हीं मांगों के साथ राजस्थान के अंदर संपन्न हुआ दिवस
जोधपुर में धूमधाम से मनाया गया वह दिवस
जा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के अंदर की फौज ने युद्ध लड़ा था वही आज भी राजस्थान के अंदर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स इसके पास आउट है बीएसएफ में ऊंटों पर सवार होकर ऊंटों को सजा बजाकर जोधपुर के अंदर मेहरानगढ़ फोर्ट तक ऊंटों का एक बड़ा टोला मेहरानगढ़ फोर्ट पर गया जहां पर घूम फिर के वहां पर उनके मान-सम्मान और स्वागत के बाद में ऊंटों का टोला धीरे-धीरे कदमों से वापस अपने बीएसएफ कैंप की तरफ आया इसको देखकर लोगों के अंदर बहुत ही ज्यादा अच्छा था और लोग इसके साथ फोटो खिंचवाने और होठों का लुफ्त उठाने के नजारे को देखते ही रह गए हाल ही में बनी न्यू किला रोड ऊंटों को जोधपुर के मेहरानगढ़ फोर्ट तक जाने के अंदर सुलभ साबित हुई साथ ही यह रोड पर्यटक के रूप में भी बहुत बड़ा जो है उपयोगी साबित होगा
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