अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की शर्त पर दो हफ्ते का सशर्त सीजफायर घोषित किया था। समझौते में चीन की कूटनीतिक भूमिका अहम मानी गई थी। अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वैंस ने इस समझौते को “नाजुक” बताया था।
लेकिन बुधवार सुबह लवन द्वीप पर तेल रिफाइनरी में हुए हमले ने यह साफ कर दिया कि यह सीजफायर कितनी अस्थिर स्थिति में है। ईरानी अधिकारियों ने इसे सीजफायर का उल्लंघन बताया और हमले की कड़ी निंदा की।
हमले का दृश्य और सुरक्षा उपाय
स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे आग की लपटें रिफाइनरी से उठीं और धुआं आसमान में फैल गया। मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, रिफाइनरी के कर्मचारियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सुरक्षा और अग्निशमन दल आग पर नियंत्रण पाने और परिसर को सुरक्षित बनाने में लगे हुए हैं।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यूएई और कुवैत से भी ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। इस हमले के तुरंत बाद तेल की कीमतों में उछाल देखा गया। विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सीजफायर पूरी तरह टूट गया और होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर झटका होगा।
चीन और अन्य देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते खोजने की अपील की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभी तक इस हमले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
तेल बाजार और वैश्विक प्रभाव
हमले की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हड़बड़ी दिखी। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति सीधे वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करती है। यदि यह बंद हुआ, तो तेल की कीमतों में और तेजी आएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।








