अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच हाल ही में बनी युद्धविराम (सीजफायर) की कोशिशें शुरू होते ही कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। महज एक दिन के भीतर ही इस समझौते पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान ने आरोप लगाया है कि तय शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिससे शांति प्रक्रिया खतरे में पड़ गई है।
ईरान का सख्त रुख, अमेरिका पर भी उठाए सवाल
ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर समझौते की शर्तों का सम्मान नहीं किया गया तो बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि जब शुरुआती शर्तें ही टूट रही हैं, तो इस समझौते का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
ईरान का आरोप है कि केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि United States भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।
सीजफायर की तीन प्रमुख शर्तें कैसे टूटीं?
1. लेबनान में जारी हमले
सीजफायर की सबसे अहम शर्त यह थी कि सभी मोर्चों पर तुरंत युद्धविराम लागू होगा, जिसमें Lebanon भी शामिल था।
लेकिन ईरान का कहना है कि Israel ने लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखी, जिससे यह शर्त पूरी तरह विफल हो गई।
2. ईरानी हवाई सीमा में घुसपैठ
दूसरा बड़ा विवाद ईरान की हवाई सीमा से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार एक ड्रोन Iran के फार्स प्रांत के पास घुसा, जिसे ईरानी सुरक्षा बलों ने मार गिराया।
यह घटना उस वादे के खिलाफ मानी जा रही है जिसमें किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई थी।
3. यूरेनियम संवर्धन पर टकराव
तीसरा और सबसे संवेदनशील मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है।
ईरान का दावा है कि उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार दिया गया था, लेकिन अब इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे दोनों पक्षों के बीच भरोसा और कमजोर हो गया है।
बातचीत पर संकट के बादल
यह तय किया गया था कि आगे की बातचीत Islamabad में होगी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी संभावना कम होती नजर आ रही है।
जब शुरुआती शर्तों पर ही सहमति नहीं बन पा रही, तो किसी बड़े समाधान तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
क्या फिर भड़क सकता है युद्ध?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही तनाव कम नहीं हुआ, तो यह टकराव फिर से बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है।
Iran और Israel के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध हैं, और इस तरह के घटनाक्रम स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।
वैश्विक असर की आशंका
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा।
United States की भूमिका और वैश्विक राजनीति में उसके प्रभाव को देखते हुए, यह संकट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अस्थिरता बढ़ा सकता है।
सीजफायर का टूटना केवल एक समझौते का विफल होना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति प्रयासों के लिए भी बड़ा झटका है। अब नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाएंगे या दुनिया एक नए संघर्ष की ओर बढ़ रही है।








