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खेजड़ी बचाने की जंग तेज, क्या अब आएगा सख्त “ट्री एक्ट”?

खेजड़ी संरक्षण ,ट्री एक्ट राजस्थान ,जयपुर बैठक ,पर्यावरण कानून ,जोगाराम पटेल ,अवैध कटाई ,जियो टैगिंग
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जयपुर 2अप्रैल 2026 ( राजस्थान ) :-राजस्थान की राजधानी जयपुर में खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रस्तावित “ट्री एक्ट” कानून को लेकर गंभीर मंथन हुआ। इस बैठक में राज्य सरकार और पर्यावरण से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच व्यापक चर्चा हुई, जिसमें भविष्य की पर्यावरण नीति को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय करने की कोशिश की गई।

बैठक में राज्य के कानून मंत्री जोगाराम पटेल की मौजूदगी में पर्यावरण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने संतों के सानिध्य में शिष्टाचार भेंट कर खेजड़ी संरक्षण से जुड़े मुद्दों को विस्तार से रखा। समिति के संयोजक परसराम बिश्नोई के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को एक विस्तृत सुझाव पत्र सौंपा, जिसमें मौजूदा हालात और संभावित समाधान पर जोर दिया गया।

खेजड़ी पर बढ़ता संकट: अवैध कटाई से लेकर प्रोजेक्ट्स तक खतरा

समिति ने बैठक में स्पष्ट किया कि राजस्थान में खेजड़ी वृक्षों पर लगातार खतरा बढ़ रहा है। अवैध कटाई, रासायनिक प्रदूषण और सोलर व औद्योगिक परियोजनाओं के विस्तार के कारण इन पेड़ों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को बचाने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता बताई गई।

समिति के प्रमुख सुझाव

बैठक के दौरान प्रस्तावित “ट्री एक्ट” को प्रभावी बनाने के लिए कई अहम सुझाव रखे गए:

खेजड़ी वृक्ष को “Protected Heritage Tree” का दर्जा देने की मांग

अवैध कटाई को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित करने का प्रस्ताव

दोषियों पर 2 से 5 लाख रुपये तक जुर्माना और 3 से 7 साल तक सजा

सभी वृक्षों की जियो-टैगिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने की बात

सोलर और औद्योगिक परियोजनाओं से पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) जरूरी करने की मांग

एक पेड़ काटने पर कम से कम 20 नए पौधे लगाने और उनकी देखरेख सुनिश्चित करने का सुझाव

पर्यावरण मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट या ग्रीन ट्रिब्यूनल की व्यवस्था (6 महीने की समय सीमा)

किसानों को खेजड़ी संरक्षण के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने की सिफारिश

जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर

चेतावनी भी: नहीं मानी मांगें तो होगा आंदोलन

समिति ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि प्रस्तावित कानून में इन सुझावों को शामिल नहीं किया गया, तो पर्यावरण प्रेमियों द्वारा बड़े स्तर पर जनआंदोलन किया जा सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

कई प्रमुख लोग रहे मौजूद

इस बैठक में संत समाज और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। कई सामाजिक कार्यकर्ता और समिति सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने खेजड़ी संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की आवश्यकता पर बल दिया

यह बैठक राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि सरकार समिति के सुझावों को कानून का हिस्सा बनाती है, तो न केवल खेजड़ी वृक्षों की रक्षा होगी बल्कि प्रदेश की पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता को भी मजबूत आधार मिल सकेगा।

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