राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर इस बार प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। पिछली भर्ती (2021) में पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और नकल जैसे बड़े घोटालों के बाद सरकार और पुलिस ने इस बार कोई जोखिम नहीं लिया।
परीक्षा से ठीक पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और स्पेशल टीमों ने 15 संदिग्ध माफिया और नकल गिरोह से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया। ये सभी लंबे समय से निगरानी में थे और परीक्षा में गड़बड़ी करने की फिराक में थे।
1000 मोबाइल टावरों पर सर्विलांस: हाईटेक निगरानी
इस बार परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया गया।
पूरे प्रदेश में करीब 1000 मोबाइल टावरों को सर्विलांस पर रखा गया
संदिग्ध कॉल, लोकेशन और नेटवर्क एक्टिविटी पर नजर रखी गई
परीक्षा केंद्रों के आसपास इंटरनेट और संदिग्ध संचार पर सख्ती रही
वो 6 बड़े प्लान जिनसे रुकी धांधली
1.पहले से चिन्हित माफियाओं पर निगरानी
पिछले मामलों में शामिल संदिग्धों की लिस्ट बनाकर लगातार ट्रैकिंग की गई।
2. मोबाइल नेटवर्क कंट्रोल
एग्जाम सेंटर के आसपास मोबाइल और इंटरनेट गतिविधियों को सीमित रखा गया।
3.डमी कैंडिडेट रोकने के कड़े इंतजाम
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और कड़ी पहचान जांच से फर्जी परीक्षार्थियों को रोका गया।
4.CCTV और फ्लाइंग स्क्वॉड
हर परीक्षा केंद्र पर CCTV कैमरे और अचानक निरीक्षण करने वाली टीमों की तैनाती रही।
5.पेपर सुरक्षा के सख्त इंतजाम
प्रश्नपत्रों को स्ट्रॉन्ग रूम से सेंटर तक कड़ी सुरक्षा में पहुंचाया गया।
6. स्पेशल पुलिस टीम और इंटेलिजेंस इनपुट
इंटेलिजेंस एजेंसियों और पुलिस की संयुक्त टीम ने पहले ही नेटवर्क तोड़ दिया।
2021 की गलती से लिया सबक
SI भर्ती 2021 में बड़े स्तर पर पेपर लीक और फर्जीवाड़ा सामने आया था, जिसके चलते पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस बार उसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए सख्त रणनीति अपनाई गई।इस बार की कार्रवाई से साफ है कि प्रशासन परीक्षा प्रणाली को साफ और पारदर्शी बनाने के लिए गंभीर है। समय रहते गिरोह पर कार्रवाई और हाईटेक निगरानी की वजह से परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होने की उम्मीद बढ़ गई है।








