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दर्द के बीच दमदार जीत पिता को खोकर भी 97%+, तो कहीं 99% से चमके सपने… 10वीं टॉपर्स की प्रेरक कहानियां

RBSE 10th Result 2026 ,राजस्थान 10वीं टॉपर्स ,भावेश गोदारा ,चंद्रिका विश्नोई ,खुशबू टॉपर
RBSE 10th Result 2026 ,राजस्थान 10वीं टॉपर्स ,भावेश गोदारा ,चंद्रिका विश्नोई ,खुशबू टॉपर

राजस्थान के बाड़मेर, जालोर और हिंडौन सिटी से सामने आई 10वीं बोर्ड टॉपर्स की कहानियां सिर्फ अच्छे अंकों की नहीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और अटूट आत्मविश्वास की मिसाल हैं। इन होनहार छात्रों ने साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।

परीक्षा के बीच पिता का निधन, फिर भी 97.67% से चमके भावेश

बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र के तेजियावास गांव के रहने वाले भावेश गोदारा के लिए 10वीं बोर्ड परीक्षा जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा बन गई। परीक्षा के दौरान ही उनके पिता बाबूलाल गोदारा का हार्ट अटैक से निधन हो गया।

जहां एक तरफ घर में शोक का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ अधूरी परीक्षा सामने थी। हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान के पेपर देने के बाद अचानक यह हादसा हुआ, जिससे भावेश पूरी तरह टूट गए।

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लेकिन इसी कठिन समय में उनके स्कूल के प्रिंसिपल हुकमाराम बैरड़ ने उन्हें संभाला। उन्होंने भावेश को समझाया कि पिता के सपनों को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

भावेश ने हिम्मत नहीं हारी और बाकी परीक्षा दी। परिणाम आया तो सभी चौंक गए—उन्होंने 97.67% अंक हासिल किए। खास बात यह रही कि हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान में उन्होंने 100 में से 100 अंक प्राप्त किए।

भावेश का कहना है कि उनके पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे और अब उनका यही लक्ष्य है।

जालोर की चंद्रिका: तनाव के बीच 99% और ISRO का सपना

जालोर की चंद्रिका विश्नोई ने भी कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। परीक्षा के दौरान उनके घर का माहौल पुलिस जांच और पूछताछ के कारण काफी तनावपूर्ण था।

ऐसे माहौल में पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन चंद्रिका ने हार नहीं मानी। उनके दादा पाबूराम ने उन्हें हिम्मत दी और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।

चंद्रिका ने खुद को एक अलग कमरे में सीमित कर लिया और रोजाना 2 से 4 घंटे नियमित पढ़ाई की। स्कूल के शिक्षकों का भी उन्हें पूरा सहयोग मिला।

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नतीजा—चंद्रिका ने 99% अंक हासिल किए। गणित में 100 और संस्कृत में 99 अंक लाकर उन्होंने अपनी मेहनत साबित कर दी।

चंद्रिका पहले ही 7वीं कक्षा में ‘छू ले अब वो नभ, नभ दूर नहीं’ नाम की किताब लिख चुकी हैं, जो 10वीं में प्रकाशित हुई। अब उनका सपना वैज्ञानिक बनकर ISRO में देश की सेवा करना या पायलट बनना है।

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खुशबू का लक्ष्य IIT: पिता के सपनों को देना है नई उड़ान

हिंडौन सिटी की खुशबू ने भी 99% अंक हासिल कर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। उनके लिए यह सफलता सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि पिता के सपनों को पूरा करने की शुरुआत है।

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खुशबू का सपना आईआईटी से इंजीनियरिंग कर देश की सेवा करना है। उनका कहना है कि उनके पिता हमेशा उन्हें आत्मनिर्भर और सफल देखना चाहते थे, और अब उनका हर कदम उसी दिशा में है।

संघर्ष से सफलता तक: इन कहानियों से मिलती है सीख

इन तीनों छात्रों की कहानियां यह बताती हैं कि—

  • मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते

  • परिवार और गुरुओं का साथ सबसे बड़ी ताकत होता है

  • लक्ष्य साफ हो तो रास्ता खुद बन जाता है

ये छात्र न केवल अपने परिवार के लिए गर्व हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं। इन्होंने साबित कर दिया कि असली जीत वही है, जो संघर्ष के बाद मिलती है।

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