जयपुर: राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर अनिश्चितता फिर गहरा गई है। राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर चुनाव कराना फिलहाल संभव नहीं है, और इसके लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई है।
कोर्ट की समयसीमा पर सरकार की दलील
हाईकोर्ट ने पहले 15 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह समयसीमा व्यवहारिक नहीं है। सरकार की ओर से पेश पक्ष में बताया गया कि कई प्रशासनिक, तकनीकी और व्यवस्थागत बाधाएं सामने आ रही हैं।
चुनाव प्रक्रिया क्यों अटकी?
सरकार ने अदालत को बताया कि चुनाव कराने में कई स्तरों पर दिक्कतें हैं, जैसे:
चुनावी स्टाफ की कमी
स्कूलों/भवनों की उपलब्धता
ईवीएम मशीनों की व्यवस्था
आरक्षण निर्धारण में देरी
इन सभी कारणों के चलते चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी करना कठिन बताया गया है।
OBC आरक्षण बना बड़ा मुद्दा
सरकार ने राजस्थान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को चुनाव में देरी का अहम कारण बताया है।
आयोग का गठन मई 2025 में हुआ
रिपोर्ट तैयार करने में कई बार समय लिया गया
नई रिपोर्ट के आधार पर ही SC, ST, OBC और महिलाओं के लिए आरक्षण तय होगा
सरकार का कहना है कि बिना नए आरक्षण लागू किए चुनाव कराना सामाजिक न्याय के खिलाफ होगा।
“वन स्टेट, वन इलेक्शन” का प्लान
सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह अक्टूबर से दिसंबर के बीच चुनाव कराना चाहती है, क्योंकि उसी समय कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
इससे सभी चुनाव एक साथ कराने की योजना—“वन स्टेट, वन इलेक्शन”—को लागू किया जा सकता है।
अब क्या होगा आगे?
इस पूरे मामले में अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। कोर्ट यह तय करेगा कि सरकार को चुनाव टालने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए या पहले के आदेश को ही लागू रखा जाए।राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव फिलहाल असमंजस में हैं। सरकार प्रशासनिक तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया का हवाला देकर समय चाहती है, जबकि अंतिम फैसला अब अदालत के रुख पर निर्भर करेगा।








