पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ईरान के पास स्थित रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति मिल गई है। इससे खाड़ी देशों से भारत आने वाली एलपीजी की आपूर्ति फिर से सुचारू होने की उम्मीद बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, लाखों एलपीजी सिलेंडर लेकर जा रहे भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पास पहुंच गए थे, लेकिन क्षेत्र में चल रहे तनाव और सुरक्षा कारणों के चलते उनकी आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इस बीच भारत और ईरान के बीच उच्च स्तर पर बातचीत हुई, जिसके बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की इजाजत दे दी।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच चर्चा हुई थी। बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए मार्ग खोलने पर सहमति जताई। इससे भारत के लिए गैस आपूर्ति का रास्ता सुरक्षित हो गया है।
दुनिया के लिए अहम समुद्री मार्ग
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत के लिए भी यह मार्ग बेहद अहम है क्योंकि कतर समेत कई खाड़ी देशों से एलपीजी और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की रणनीति
वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे समय में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। भारत एक ओर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों से गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक राजनीतिक माहौल में यह भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय कूटनीति का उदाहरण है। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को गुजरने की अनुमति मिलने से न केवल भारत की ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलेगी, बल्कि घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता भी प्रभावित नहीं होगी।
इस घटनाक्रम को भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, जिसने वैश्विक संकट के बीच भी देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।








