राजस्थान में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इसको लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े जरूरी आंकड़ों की कमी के कारण चुनाव प्रक्रिया अटकती नजर आ रही है। अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी और जिम्मेदारी टालने की स्थिति ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
आंकड़ों की कमी से अटका पूरा मामला
पंचायतीराज विभाग अब तक OBC जनसंख्या से जुड़े आंकड़े तय फॉर्मेट में उपलब्ध नहीं करा पाया है। ये आंकड़े पंचायत स्तर पर आरक्षण तय करने के लिए बेहद जरूरी हैं।
OBC आयोग का कहना है कि जो डेटा पहले दिया गया, वह अधूरा और त्रुटिपूर्ण था, जिसके आधार पर वार्ड स्तर पर आरक्षण तय करना संभव नहीं है।
कलेक्टरों से सहयोग न मिलने पर आयोग ने उठाया बड़ा कदम
OBC आयोग ने 24 फरवरी 2026 को मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की कि जिला कलेक्टरों से सही और पूर्ण जानकारी नहीं मिल रही है।
आयोग के सचिव (सलाहकार) अशोक जैन ने स्पष्ट कहा कि जब तक सही डेटा नहीं मिलेगा, तब तक आरक्षण निर्धारण नहीं किया जा सकता।
चिट्ठियों का दौर: विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर केवल पत्राचार चलता नजर आ रहा है—
मुख्य सचिव ने मामला पंचायतीराज विभाग को भेजा
पंचायतीराज विभाग ने जिम्मेदारी आयोजना विभाग पर डाल दी
आयोजना विभाग ने कहा कि काम शुरू करेंगे
इस प्रक्रिया में एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक ठोस प्रगति नहीं हुई है।
31 मार्च तक ही आयोग का कार्यकाल, समय बेहद कम
OBC आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2026 तक ही है। ऐसे में यह संभावना कम लग रही है कि तय समय में आयोग को सभी जरूरी आंकड़े मिल पाएंगे और वह अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकेगा।
क्या है नया फॉर्मेट, क्यों जरूरी है डेटा?
आयोग ने पंचायत स्तर पर आरक्षण तय करने के लिए एक विस्तृत फॉर्मेट जारी किया है, जिसमें शामिल हैं—
जिला, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत का विवरण
कुल वार्ड और कुल जनसंख्या
SC/ST जनसंख्या और आरक्षित सीटें
OBC जनसंख्या और उसका प्रतिशत
बिना इस फॉर्मेट के सही डेटा के, आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती।
चुनाव टालना जरूरी नहीं
राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व आयुक्त मधुकर गुप्ता का कहना है कि पंचायत चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है, न कि सरकार की।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि OBC आयोग की रिपोर्ट के बिना भी चुनाव कराए जा सकते हैं।
कानून के अनुसार, पंचायतों का चुनाव हर हाल में 5 साल के भीतर कराया जाना जरूरी है।
क्या समय पर होंगे चुनाव?
वर्तमान हालात को देखते हुए यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या राजस्थान में पंचायत चुनाव समय पर हो पाएंगे।
अगर जल्द ही विभागों के बीच समन्वय नहीं बना और सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हुए, तो चुनाव प्रक्रिया और अधिक उलझ सकती है। हालांकि कानूनी प्रावधानों के चलते चुनाव पूरी तरह टलना भी आसान नहीं होगा।
राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर प्रशासनिक सुस्ती और विभागों की आपसी खींचतान बड़ा कारण बनती नजर आ रही है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तय समय सीमा में डेटा जुटाकर आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी या फिर बिना OBC आरक्षण के ही चुनाव कराए जाएंगे।








