28 फ़रवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल की वायु सेनाओं ने अचानक ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य व राजनीतिक नेताओं की मौत हो गई — यह संघर्ष इसी दिन से शुरू माना जाता है।
ये हवाई हमले संयुक्त रूप से “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” (अमेरिका) और “लायंस रोर” (इज़राइल) नाम से चलाए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को भयंकर रूप से क्षतिग्रस्त करना बताया गया।
23 दिनों में युद्ध की तस्वीर
मुकाबला तेज और व्यापक
शुरूआती हमला के बाद ईरान ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन इज़राइल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों में मिसाइल बेसों पर छोड़े।
इज़राइल के तेल रिफाइनरी और बिजली नेटवर्क पर मिसाइल हमले भी हुए जिनसे गंभीर नुकसान हुआ।
नुकसान का माप
• युद्ध के पहले कुछ ही दिनों में बेहद भारी विनाश हुआ — हज़ारों लक्ष्य बमबारी में क्षतिग्रस्त या नष्ट।
• अनेक देशों में बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ, नागरिकों को बड़ी मुश्किलें झेलनी पड़ीं और विश्व ऊर्जा आपूर्ति के दबाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं।
नेताओं और कमांडर की मौतें
अमेरिका‑इज़राइल के हमलों में ईरान के शीर्ष नेताओं में कई की मौत हुई है, जिनमें सेनाध्यक्ष भी शामिल हैं। परंतु इनके बावजूद ईरान ने प्रतिरोध जारी रखा।
ईरान क्यों हार नहीं मान रहा?
युद्ध में ईरान अब भी संघर्ष जारी रख रहा है — इसके कई कारण हैं:
रक्षा और अस्तित्व की भावना
ईरानी नेतृत्व इसे “आत्मरक्षा और राष्ट्रीय अस्तित्व की लड़ाई” बता रहा है। खामेनेई की मौत के बाद भी ईरान ने मिसाइल हमलों और प्रतिशोध जारी रखा है, यह संदेश देने के लिए कि वह दबाव में नहीं झुकेगा।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
ईरान के पास कुछ देशों से अप्रत्यक्ष समर्थन है, और उसने इसे पश्चिमी दबाव के खिलाफ आत्मनिर्भरता की लड़ाई बना दिया है। इसके अलावा मध्य पूर्व में इसके सहयोगी समूह भी अलग‑अलग मोर्चों पर संघर्ष में शामिल हैं।
रणनीतिक लाभ
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद करने की धमकी और तेल मार्गों को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बना है। इससे अमेरिका‑इज़राइल पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।
ट्रम्प‑नेटन्याहू की रणनीति और “बाहर निकलने का रास्ता”
यह युद्ध न केवल सैन्य लड़ाई है बल्कि राजनैतिक जाल भी है।
ट्रम्प का इरादा
ट्रंप ने कई बार कहा है कि यह अभियान “लक्ष्यों के पूरा होने तक” जारी रहेगा।
वह चाहता है कि ईरान का असर कम हो और उसे वैश्विक स्तर पर दबे हुए दिखाई दे। यही कारण है कि वह युद्ध को लंबा खींचने की क्षमता की बात कर रहे हैं — लेकिन साथ ही यह भी कहते हैं कि उसे राजनयिक हल मिल सकता है।
राजनैतिक दबाव और बातचीत
कुछ स्तरों पर डिप्लोमैटिक वार्ता के संकेत मिल रहे हैं — जैसे जीनेवा में बातचीत का प्रयास, जहां विमर्श जारी है कि संघर्ष को कैसे रोका जाए और तनाव को कम किया जाए।
सीज़फायर की शर्तें
ईरान ने सीज़फायर के लिए कुछ शर्तें रखीं, लेकिन ट्रंप की ओर से कहा गया है कि बिना शर्त आत्मसमर्पण संभव नहीं है।








